कोचिंग छात्रों से मन की बात

कोचिंग छात्रों से मन की बात

 

  1. प्रिय छात्रों, मैं (B.Chand /IITian, Ex.Assistant Commandant and IES(Indian Railways)),आज आपसे एक बहुत ही जरूरी विषय पर बात करना चाहता हूं! दरअसल बात यह है कि हमारे देश की शिक्षा प्रणाली इतनी ज्यादा खराब हो चुकी है कि इंजीनियरिंग करने के बाद नौकरी मिलने की संभावना लगभग ना के बराबर है! बीटेक की डिग्री पूर्ण होने के बाद,ENGINEERS बेरोजगार रहता है और जब यह बेसहारा एवं बेरोजगार ENGINEER नौकरी की तैयारी के लिए किसी कोचिंग संस्थान का दरवाजा खटखटाता है तो वहां पर भी इसको धोखा ही मिलता है!

 

  1. आखिर यह कैसा धोखा है? जो इन कोचिंग संस्थानों के द्वारा बेसहारा और बेरोजगार ENGINEERS को दिया जाता है, आज मैं इसकी पोल यहां पर आपके सामने खोल रहा हूं! वस्तुतः बात यह है कि मार्केट में दो प्रकार की कोचिंग संस्थाएं मौजूद है! पहले प्रकार में, मैं उन कोचिंग संस्थानों को रखना चाहूंगा जो कोचिंग संस्थाएं एक कक्षा में एक साथ 500 से भी अधिक बच्चों को एक साथ पढ़ाती है वहीं दूसरे प्रकार में, वे कोचिंग संस्थाएं आती है जो कक्षा में एक साथ लगभग 10 बच्चों से लेकर 200 बच्चों तक एक साथ पढ़ाती है! यह दोनों ही प्रकार की कोचिंग संस्थाएं अलग-अलग तरीकों से मासूम बच्चों को बेवकूफ बनाती है!

 

  1. मैं सबसे पहले बात करूंगा इन बड़ी कोचिंग संस्थानों कि जो कक्षा में एक साथ 500 से भी अधिक बच्चों को एक साथ पढ़ाती है! सबसे पहले आप अपने आपसे एक सवाल पूछो कि क्या इंजीनियरिंग 500 बच्चों को एक साथ बिठाकर बिना किसी लैब एक्सपेरिमेंट के सिर्फ 4 से लेकर 6 महीने में सिखाई जा सकती है? 500 की कक्षा में यकीन मानिए लगभग 450 बच्चे पढ़ने में एवरेज या BELOW एवरेज होते हैं! इन सभी बच्चों को कुछ ना कुछ डाउट जरूर आता है! परंतु कक्षा में 450 बच्चों के द्वारा डाउट पूछा जाना एवं  उस डाउट का जवाब टीचर के द्वारा दिया जाना असंभव है! क्योंकि एक कक्षा लगभग 4 घंटे  की होती है जिसमें 240 मिनट होते हैं अब 240 मिनट में अगर 450 डाउट पूछे जाए तो उन सभी डाउट को क्लियर करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है इस प्रकार यहां पर एक बात तो साफ हो गई कि 500 बच्चों को एक साथ एक कक्षा में पढ़ाने वाली कोचिंग संस्थानों में एवरेज या फिर BELOW एवरेज बच्चा अपने DOUBTS क्लियर नहीं कर पाता है! कुछ शिक्षक तो इतने OVERSMART होते हैं कि  कक्षा में यह ANNOUNCEMENT भी कर देते हैं कि कमजोर बच्चे अपने DOUBTS कक्षा पूर्ण होने के बाद में पूछे! परंतु कुछ DOUBTS इस प्रकार के होते हैं कि उनका ऑन द स्पॉट ही क्लियर किया जाना जरूरी है वहीं दूसरी ओर कक्षा पूर्ण होने के बाद भी क्या वह टीचर उन सभी 450 बच्चों के डाउट क्लियर कर पाएगा जो पढ़ने में एवरेज या फिर BELOW एवरेज हैं? क्या वह टीचर 240 मिनट की कक्षा समाप्त होने के बाद में 450 मिनट या फिर उससे भी ज्यादा समय के लिए कक्षा के बाहर रुकेगा ताकि  उन सभी बच्चों के DOUBTS क्लियर हो सके!? तो कुल मिलाकर बात यहां पर साफ हो जाती है कि इन बड़ी-बड़ी कोचिंग संस्थानों में एवरेज या फिर BELOW एवरेज बच्चा अपने DOUBTS क्लियर नहीं कर पाता!
  2. यहां पर मुद्दे की बात यह है कि एग्जाम में सिर्फ वही बच्चा आगे निकल पाता है जिसके सभी CONCEPTS क्रिस्टल क्लियर होते हैं क्योंकि आसान आसान CONCEPTS तो लगभग सभी बच्चों को अच्छे से आते हैं!

 

  1. सच्चाई तो यह है कि 500 बच्चों को एक साथ देख कर एक साधारण सा बच्चा, पढ़ने में एवरेज और BELOW एवरेज बच्चा, एक गांव से BELONG करने वाला बच्चा, एक हिंदी मीडियम का बच्चा, एक साधारण से प्राइवेट कॉलेज में पढ़ा हुआ बच्चा, खड़ा होकर अपने DOUBTS टीचर के सामने रखने की हिम्मत नहीं जुटा पाता! वहीं दूसरी ओर देखा जाए तो कक्षा का आकार(DIMENSIONS) इतना ज्यादा बड़ा होता है कि सबसे LAST की पंक्ति में बैठने वाला बच्चा अगर कुछ बोलता है तो उसकी आवाज  टीचर तक पहुंच भी नहीं पाती! IN FECT इन CLASSROOMS का साइज बहुत ज्यादा बड़ा होता है की पीछे की पंक्तियों में बैठने वाले बच्चों की EYE SIGHT 6/6 होना जरूरी है!

 

  1. अब यहां पर आप इस बात से हैरान होंगे कि अगर ऐसा ही है तो फिर इन कोचिंग संस्थाओं से इतने सारे बच्चों का विभिन्न प्रकार की सरकारी सेवाओं में चयन कैसे हो जाता है? दरअसल बात यह है कि यह कोचिंग संस्थाएं पूरे देश में कहीं दर्जनों सेंटर चलाती हैं जहां पर अगर सभी सेंटरों की सभी कक्षाओं को जोड़ा जाए तो इनके 100 से भी ज्यादा क्लासरूम मौजूद है! अब अगर एक क्लास रूम से अगर 5 बच्चों का सलेक्शन होता है तो पूरे इंडिया से 500 बच्चों का सिलेक्शन होना स्वाभाविक है परंतु अगर हम सलेक्शन रेट की बात करें तो वह 1% भी नहीं है!99% से भी ज्यादा बच्चे कोचिंग करने के बाद भी बेरोजगार घूम रहे हैं और इस बात का जीता जागता सबूत है GATE का रिजल्ट! आप GATE-2018 के रिजल्ट का एनालिसिस करके देखो तो आपको पता चलेगा कि हमारे देश के सिर्फ 15% ENGINEERS ही GATE को QUALIFY कर पाते हैं! जबकि क्वालीफाइंग मार्क्स काफी कम होते हैं! खासतौर पर सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग जैसी ब्रांच के लिए क्वालीफाइंग मार्क्स लगभग 25% से 30% के बीच में होते हैं और मैकेनिकल इंजीनियरिंग जैसी ब्रांच के लिए भी क्वालीफाइंग मार्क्स सिर्फ 30% से 35% के बीच में ही होते हैं!

 

  1. तो यहां पर कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि हमारे देश के इंजीनियरिंग ग्रेजुएट, कोचिंग संस्थाओं में भारी भरकम फीस देने के बाद भी और 1 या फिर 2 साल या फिर 3 साल या फिर उससे भी ज्यादा वर्षों तक पढ़ाई करने के बाद भी कोई खास मुकाम हासिल नहीं कर पाते !तो यहां पर यह बात साफ हो जाती है कि इन बड़ी-बड़ी कोचिंग संस्थानों में एक एवरेज एवं BELOW एवरेज बच्चे के लिए एडमिशन लिया जाना किसी मूर्खतापूर्ण कदम से कम नहीं है!

 

  1. इस तरह का बिजनेस करके इन बड़ी-बड़ी कोचिंग संस्थानों के पास इतना ज्यादा पैसा आ जाता है कि उस पैसे के बदौलत बहुत ज्यादा मार्केटिंग करके देश के सभी बेसहारा ,बेरोजगार एवं मासूम ENGINEERS को यह एहसास दिला देते हैं कि उनके यहां एडमिशन लेने से इनकी नौकरी तो लग ही जाएगी जबकि इन कोचिंग संस्थाओं को ऐसा नहीं करना चाहिए! इन कोचिंग संस्थाओं को अपने सभी चयनित बच्चों की डिटेल  इंफॉर्मेशन अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध करानी चाहिए ताकि एक आम बच्चे को यह पता चल सके कि जिस बच्चे का चयन हुआ है आखिर उस बच्चे ने कॉलेज में कितनी पढ़ाई की है और कोचिंग में कितने साल पढ़ाई की है, क्या वह बच्चा स्कूल के समय से ही तो कहीं बहुत ज्यादा इंटेलिजेंट नहीं है? क्या वह बच्चा किसी IIT का टॉपर तो नहीं है? क्या वह बच्चा किसी एनआईटी का TOPPER  तो नहीं है? क्या वह बच्चा कहीं कोचिंग में 5 सालों तक पढ़ कर तो सफल नहीं हुआ? यह सारी इनफार्मेशन कोचिंग संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध करा देनी चाहिए ताकि जिससे एक साधारण बच्चा एक सही डिसीजन ले सके!

 

  1. वर्तमान में जो इंजीनियर कोचिंग करने के बाद भी बेरोजगार घूम रहे हैं उनकी बेरोजगारी का कहीं ना कहीं सबसे बड़ा कारण इन बड़ी-बड़ी कोचिंग संस्थानों के द्वारा की जाने वाली भ्रमित मार्केटिंग है! अब यहां पर कुछ बुद्धिजीवी लोग यह भी कमेंट कर सकते हैं कि गवर्नमेंट सेक्टर में जॉब की बहुत कम है तो बेचारे कोचिंग वाले सभी बच्चों की नौकरी कैसे लगवा देंगे? परंतु मेरा सवाल यहां पर यह है कि क्या इन कोचिंग संस्थानों ने अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया है? क्या इन कोचिंग वालों की यह ड्यूटी नहीं बनती कि बच्चों को सही तरीके से पढ़ा दे!क्या इन बच्चों को 40-50 की कैपेसिटी के कक्षा में बहुत ही आराम से धीरे-धीरे प्रयोगशालाओं की मदद से इंजीनियरिंग नहीं सिखाई जा सकती ? ताकि सरकारी क्षेत्र में ही नहीं बल्कि किसी ना किसी प्राइवेट क्षेत्र मैं भी नौकरी लग सके! क्योंकि बेरोजगारी से तो बढ़िया है कि किसी प्राइवेट सेक्टर में ठीक-ठाक सैलरी पर नौकरी कर लेवे!

 

  1. कुछ कोचिंग वाले यहां पर यह भी आर्गुमेंट कर सकते हैं कि मार्केट में अच्छे टीचर्स की भारी कमी है इसलिए हम छोटी-छोटी कक्षाओं के रूप में बहुत सारे BATCHES बनाकर नहीं पढ़ा सकते! यहां पर मैं यह कहना चाहूंगा कि यह कोचिंग वाले इंजीनियरिंग के बच्चों को कोई रॉकेट लॉन्च करना नहीं सीखा रहे हैं !JUST बेसिक B.TECH का नॉलेज  सिखा रहे हैं तो उसके लिए मार्केट में टीचर क्रिएट करना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है! लेकिन सीधी-सीधी सी यहां पर यह बात है कि अगर बहुत सारे BATCHES चलेंगे तो बहुत सारे टीचर्स को सैलरी देनी पड़ेगी जिससे इन कोचिंग वालों का प्रॉफिट मार्जिन काफी कम हो जाएगा! इसलिए यह कोचिंग संस्थाएं इस प्रकार का कोई डिसीजन नहीं लेना चाहते जिससे इनका प्रॉफिट मार्जिन कम हो!

 

  1. यहां पर हैरानी की बात तो यह है कि इन कोचिंग संस्थाओं को चलाने वाले IIT GRADUATES और IES ऑफिसर है,जिनसे समाज को यह उम्मीद रहती है कि कम से कम यह लोग तो समाज के लिए कोई बहुत ही अच्छा/बहुत ही नेक काम करेंगे/समाज की समस्याओं को सुलझाएंगे! परंतु यह लोग इन कोचिंगों की आड़ में समाज के बेसहारा, लाचार और बेरोजगार ENGINEERS का खून चूस रहे हैं जो कि बिल्कुल भी ठीक नहीं है!

 

  1. यहां पर एक और रोचक बात यह है कि इन कोचिंग संस्थाओं से पढ़कर बेरोजगार रह जाने वाले छात्रों का यह मानना है कि उनके टीचर्स के पास में बहुत नॉलेज था एवं अपनी बेरोजगारी का कारण अपने आप को मानते हैं! किसी टीचर के पास नॉलेज का होना और उस नॉलेज को प्रभावी तरीके से छात्रों तक पहुंचाना, दोनों ही अलग-अलग बातें हैं, टीचर का असली काम अपने नॉलेज को किसी भी तरीके से बच्चे तक पहुंचाना होता है ना कि अपने नॉलेज का प्रदर्शन करना होता है! इन कोचिंग संस्थानों के टीचर केवल अपने नॉलेज का 500 बच्चों के सामने प्रदर्शन मात्र करते हैं! इन बड़ी-बड़ी कोचिंग संस्थाओं के टीचर अपने नॉलेज को प्रभावी तरीके से सभी 500+ STUDENTS को देने में पूरी तरीके से असफल रहते हैं और इस बात का जीता जागता सबूत यह है कि इन कोचिंग संस्थाओं में पढ़ने के बाद भी अधिकतर बच्चे GATE में अच्छा स्कोर नहीं कर पाते जबकि GATE में नंबर ऑफ सीट्स का कोई ISSUE भी नहीं है तो इस बात से साफ साफ जाहिर होता है कि यह बच्चे इन टीचर्स को बहुत बड़ी चीज मानते हैं जो कि सही नहीं है! टीचर के पास  नॉलेज होना बहुत अच्छी बात है परंतु वह नॉलेज किसी काम का नहीं है जो नॉलेज टीचर अपने बच्चों को ना दे सके !इन बड़ी-बड़ी कोचिंग संस्थाओं मैं ऐसा ही हो रहा है, टीचर्स के पास में नॉलेज तो जरूर है परंतु वह नॉलेज स्टूडेंट तक नहीं पहुंच पा रहा है क्योंकि क्लास में 500 से भी ज्यादा बच्चों को एक साथ पढ़ाया जा रहा है!
  2. तो अंत में इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि इन बड़ी-बड़ी कोचिंग संस्थानों में जिनमें एक साथ एक कक्षा में 500 से भी अधिक बच्चों को बिठाकर पढ़ाया जाता है, एवरेज एवं BELOW एवरेज बच्चे के लिए प्रवेश लेना व्यर्थ है!

 

  1. अब मैं बात करूंगा छोटी-छोटी कोचिंग संस्थानों की, इन कोचिंग संस्थाओं को चलाने वाले लोग खुद बेरोजगार हैं! इन कोचिंग संस्थाओं के मालिकों ने खुद ने कभी कोई एग्जाम पास नहीं किया है ! इन लोगों ने बस ENGINEERS की जो बेसहारा और लाचार हालत को देखकर मौके पर चौका लगाने की ठान ली है और  आसानी से बेवकूफ बनाने का एक कोचिंग रूपी प्लेटफार्म तैयार कर लिया है! इन कोचिंग संस्थाओं के मालिकों के पास किसी भी प्रकार की कोई क्वालिफिकेशन नहीं है!इन छोटी-छोटी कोचिंग संस्थानों के मालिकों के नाम भी बच्चे नहीं जानते हैं ना ही इन कोचिंग के मालिक अभी क्लास में आकर पढ़ाते हैं!किसी रेस्टोरेंट का मालिक हलवाई नहीं है फिर भी उसके UNDER अगर सैकड़ों हलवाई काम करते हैं तो वहां पर उन हलवाइयों से गुणवत्तापूर्ण काम करवाना एक  असंभव सा कार्य है

 

 

  1. सभी छोटी-छोटी कोचिंग संस्थाएं, भ्रमित सलेक्शन दिखाकर एवं कम फीस का लालच देकर बच्चों को अपनी और आकर्षित करती है! क्या आपने इन कोचिंग संस्थाओं द्वारा छापे गए बच्चों के रिजल्ट को वेरीफाई किया है? क्या इन बच्चों को आपने इन कोचिंग संस्थानों की कक्षाओं में कभी पढ़ते हुए देखा है? अगर आप अच्छी तरह से जांच पड़ताल करोगे तो आपको पता चलेगा कि इन कोचिंग संस्थाओं द्वारा छापे गए 99 परसेंट रिजल्ट झूठे होते हैं! इन कोचिंग संस्थाओं को अच्छी तरह पता है कि एक मासूम बच्चा इनके रिजल्ट को कभी वेरीफाई नहीं कर सकता है इसलिए फर्जी रिजल्ट छापने मैं क्यों कमी रखी जाए?

 

  1. इन कोचिंग संस्थाओं में सिर्फ एक या दो फैकल्टी अच्छी होती है जो शुरुआत में पढ़ाती है, इसीलिए यह कोचिंग संस्थाएं सिर्फ एक सब्जेक्ट की ही डेमो देती है ताकि बच्चों की फीस जमा हो जाए ! उसके बाद में घटिया से घटिया फैकल्टी के द्वारा रिमेनिंग सभी सब्जेक्ट पूर्ण करवा दिए जाते हैं !

 

 

  1. इन कोचिंग संस्थाओं में क्लास रूम का आकार तो छोटा होता है लेकिन सभी फैकल्टी अच्छी नहीं होने की वजह से बच्चे कुछ खास सीख नहीं पाते हैं! कभी भी सिलेबस पूरा नहीं कराया जाता है! IES के बैच में IES प्री के आसान-आसान QUESTIONS करवाकर सिलेबस पूरा करवा दिया जाता है, एसएससी-जेई के बेच में भी ONLY SSC-JE PRELIMS  के आसान-आसान से कुछ QUESTIONS करवाकर सिलेबस करवा दिया जाता है, इसी प्रकार अन्य सभी एग्जाम के लिए भी सिलेबस पूरा करवा दिया जाता है! यह लोग प्री और मेंस दोनों के हिसाब से FEE वसूल करते हैं परंतु सिलेबस ONLY PRELIMS के हिसाब से भी नहीं करवाया जाता! बच्चों को कभी भी क्लास में टीचर पिछले 25 साल के QUESTIONS सॉल्व नहीं करवाता है! नाही बच्चों को खुद सॉल्व करने के लिए बोलता है क्योंकि अगर बच्चा पिछले 25 साल के क्वेश्चन सॉल्व करने बैठेगा तो पता चलेगा कि टीचर ने तो उनको कुछ भी नहीं पढ़ाया है, आसान-आसान थ्योरी पढ़ाकर कुछ एक EASY QUESTIONS करवाना इन कोचिंग के टीचर की एक बहुत ही सोची समझी चाल होती है जिससे फीडबैक भी अच्छा आए और सिलेबस भी जल्दी निपट जाए परंतु जब बच्चा एग्जाम देने जाता है तो उस दिन उसको पता चलता है कि उसने साल भर क्या पढ़ाई की है और उसके टीचर ने उसको क्या पढ़ाया है लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो जाता है बच्चों का पैसा भी और टाइम भी!

 

  1. यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रत्येक एग्जाम में चाहे वह IES का एग्जाम हो, चाहे वह गेट का एग्जाम हो या फिर वह और कोई एग्जाम हो लगभग 80 परसेंट कंसेप्ट रिपीट होते हैं पुराने 25 साल के क्वेश्चन पेपर से, इसलिए पुराने 25 साल के क्वेश्चन को अच्छी तरह किया जाना एक कैंडिडेट के लिए बहुत ही आवश्यक हो जाता है परंतु यह कोचिंग संस्थान बच्चों की इन पुराने 25 साल के क्वेश्चन को सॉल्व करने में किसी प्रकार की कोई मदद कर नहीं करती है इन फैक्ट इन बच्चों को पुराने 25 साल के क्वेश्चंस के बारे में कुछ बताती भी नहीं है

 

 

  1. यह कोचिंग संस्थाएं आपको कभी भी प्रत्येक सब्जेक्ट का डेमो नहीं देगी ना ही यह कभी भी सब्जेक्ट वाइज एडमिशन देने की सुविधा उपलब्ध कराती है! इन कोचिंग संस्थाओं को अच्छी तरह पता है कि इनकी सभी फैकल्टी अच्छी नहीं है इसलिए अगर सब्जेक्ट वाइज एडमिशन दे दिया और हर सब्जेक्ट का डेमो भी दे दिया तो इनके पास में कोई भी पढ़ने नहीं आएगा इसलिए यह सिर्फ और सिर्फ केवल एक सब्जेक्ट का डेमो देते हैं  ताकि फीस जमा हो जाए और उसके बाद में यह मनमाने तरीके से किसी भी टीचर से सिलेबस पूरा करवा दे!

 

  1. इन कोचिंग संस्थाओं का, बच्चों का सिलेक्शन करवाना कभी भी टारगेट नहीं होता है क्योंकि जिस दिन एग्जाम का रिजल्ट आता है उस दिन खुद बच्चे पूरे देश भर से कोचिंग संस्थाओं को कॉल करते हैं और अपनी फोटो छपवाने के बदले में कुछ पैसों की डिमांड करते हैं तो इस प्रकार कोचिंग संस्थाओं को बहुत ही आसानी से बच्चों के रिजल्ट मिल जाते हैं इसलिए इन कोचिंग संस्थाओं का एकमात्र टारगेट बच्चों से फीस वसूलने और उसको बचा कर अपने बैंक का अकाउंट भरना और मार्केटिंग करके आने वाले बच्चों को बेवकूफ बनाना होता है!

 

  1. अब आप यहां पर यह सोच रहे होंगे कि इन सब प्रॉब्लम्स के बारे में डिस्कस करने का क्या औचित्य है जब किसी कोचिंग में हमने ऑलरेडी फीस डिपाजिट कर दी है तो? मैं आपको यहां पर सिर्फ यह सुझाव देना चाहता हूं कि आप कैसे भी करके for example अगर आप कहीं पर IES की कोचिंग कर रहे हो तो आप वहां पर कैसे भी करके IES के पुराने 25 साल के ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन सॉल्व करो एवं पुराने 25 साल के कन्वेंशनल क्वेश्चंस भी सॉल्व करो! उनके साथ में जो भी डाउट आता है आप अपनी फैकल्टी को वहीं पर पूछ लो चाहे क्लास में पूछ लो या क्लास के बाद में पूछ लो अगर आप ऐसा करते हो !अगर आप ऐसा कर पाते हो और ऐसा करने में आपकी कोचिंग आपकी पूरी मदद करती है तो उस केस में आपकी कोचिंग OKEY है  अन्यथा आपकी कोचिंग अच्छी नहीं है!INFECT वहां पर क्लासेज अटेंड करके आप ना सिर्फ अपने आप को बल्कि आप अपने माता-पिता को भी धोखा दे रहे हो क्योंकि जब तक आप पुराने 25 साल के क्यूशन बहुत अच्छी तरीके से क्रिस्टल क्लियर कांसेप्ट के साथ SOLVE नहीं करोगे तब तक आप का सलेक्शन होना लगभग असंभव सा है !अगर आपकी फैकल्टी या फिर आपकी कोचिंग आपको पुराने 25 साल के क्वेश्चन SOLVE करने में मदद नहीं करती है तो यह मान के चलिए कि वह कोचिंग सिर्फ और सिर्फ आपको  बेवकूफ बना रही है! इसी प्रकार अगर आप SSC JE के बैच में एडमिशन ले चुके हो  तो भी आपकी यह  ड्यूटी बनती है कि आप SSC JE के पुराने कम से कम 25 पेपर  PRE+MAINS के SOLVE करें! वहीं दूसरी और SSC-JE का एग्जाम IES की प्रिपरेशन करने वाले बच्चे भी देते हैं तो वहां पर आपको IES लेवल के QUESTIONS SOLVE करने होंगे तब जाकर आपका एसएससी जेई में चयन होगा!

————————————————————————————————————————————Q.1 सर आपकी बातें बिल्कुल सही है! जैसा आपने बताया वैसे ही, इन कोचिंग संस्थानों की भ्रमित मार्केटिंग की वजह से मैं इनमें एडमिशन ले चुका हूं ! मुझे शुरुआत में एक या दो सब्जेक्ट तो अच्छे से पढ़ाया गए उसके बाद में अभी यह लोग अच्छे से नहीं पढ़ा रहे हैं मुझे क्या करना चाहिए?

Answer- सबसे पहले तो इस कोचिंग संस्थान में जितनी फीस जमा करा दी बस उतनी ही रहने दो, आगे कोई भी फीस मत दो! दूसरा काम, आप के जितने भी सब्जेक्ट यहां पर कंप्लीट हुए हैं उनके सभी IES(P+M), GATE एवं एसएससी जेई के प्री एवं मेंस के सारे डाउट क्लियर करो उसके बाद ही आप आगे बढ़ो!  अगर आपके यह लोग डाउट क्लियर नहीं करते हैं तो आपका वहां पर क्लास अटेंड करने का कोई तात्पर्य नहीं है! अगर आप पिछले 25 वर्षों के पेपर्स के क्वेश्चंस को अच्छी तरीके से क्रिस्टल क्लियर कांसेप्ट के साथ में सॉल्व नहीं कर पाते हो तो आपका किसी भी कोचिंग में क्लास अटेंड करने का कोई भी सेंस नहीं है आप अपने आप को एवं अपने परिवार को धोखे में रख रहे हो! यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि हर साल इंजीनियरिंग का चाहे वह कोई भी एग्जाम हो चाहे वह IES हो, चाहे वह गेट हो या फिर चाहे वह एसएससी जेई हो या फिर अन्य कोई भी एग्जाम हो, हर साल इन सभी EXAMS में लगभग 80% कांसेप्ट रिपीट होते हैं और यह कॉन्सेप्ट ऑलरेडी पिछले 25 साल के क्वेश्चंस में ऑलरेडी पूछे जा चुके हैं तो कुल मिलाकर बात यह है कि अगर किसी को सिलेक्शन चाहिए तो पिछले 25 साल के क्वेश्चंस को बहुत ही अच्छी तरीके से क्रिस्टल क्लियर कांसेप्ट के साथ में SOLVE करना ही होगा!

Q.2 सर मैं ऑलरेडी कोचिंग कर चुका हूं और जैसा आपने बताया वैसा ही मेरे साथ हुआ है वहां पर शुरू शुरू में एक सब्जेक्ट अच्छा पढ़ाया गया उसके बाद में बाकी सब्जेक्ट ऐसे TEACH किए की बिल्कुल ही समझ में नहीं आया! अब मैं घर पर बैठकर सेल्फ स्टडी कर रहा हूं लेकिन समझ नहीं रहा कि इतने ज्यादा कंपटीशन में सेल्फ स्टडी से मैं पास हो पाऊंगा या नहीं ? आप मुझे कृपया करके गाइड कीजिए

ANSWER- आप ENGINEERS PRIDE का YouTube चैनल सब्सक्राइब कीजिए वहां पर कई सैकड़ों टेक्निकल वीडियोस फ्री में उपलब्ध है उसके अलावा आप ENGINEERS PRIDE कि Android ऐप भी इंस्टॉल कर लेवे उस पर बहुत सारे टेक्निकल वीडियोस फ्री में या फिर बहुत ही कम पैसों में उपलब्ध है इन वीडियोस को आप रिपीट कर करके अपने घर पर बैठकर बहुत ही कम पैसों में सारे सब्जेक्ट बहुत अच्छे से सीख सकते हो!ENGINEERS PRIDE  कि Android ऐप में डाउट पूछने के भी बहुत ही अच्छे विकल्प उपलब्ध है या फिर  आप ENGINEERS PRIDE की offline क्लासेज भी ज्वाइन कर सकते हो!ENGINEERS PRIDE मैं आपको हर सब्जेक्ट का डेमो दिया जाएगा और सब्जेक्ट वाइज एडमिशन की सुविधा हमेशा उपलब्ध रहती है और दूसरी और फीस की बात करें तो ENGINEERS PRIDE की फीस मार्केट में जितने भी कोचिंग से उन सबसे कम होती है और quality सबसे high होती है!ENGINEERS PRIDE इंडिया का एकमात्र ऐसा कोचिंग संस्थान है जहां पर प्रत्येक सब्जेक्ट का डेमो दिया जाता है और सब्जेक्ट वाइज एडमिशन की सुविधा बच्चों को उपलब्ध करवाई जाती है ENGINEERS PRIDE के प्रत्येक सब्जेक्ट की फैकल्टी की क्वालिटी बहुत ही अच्छी होती है इसलिए ENGINEERS PRIDE को किसी भी सब्जेक्ट का डेमो देने में या फिर सब्जेक्ट वाइज एडमिशन देने में एक परसेंट भी दिक्कत नहीं आती है वहीं दूसरी और फर्जी कोचिंग संस्थान आपको सब्जेक्ट वाइज एडमिशन देने से हमेशा कतराती है! वह पर आप को मैक्सिमम करके सिर्फ एक सब्जेक्ट का ही डेमो मिलेगा

Q.3 यह ENGINEERS PRIDE कौन सी कोचिंग इंस्टिट्यूट है? और इसको चलाने वाला कौन है? थोड़ा सा बता दीजिए!

ANSWER- ENGINEERS PRIDE,IES B CHAND SIR द्वारा संचालित इंडिया का एकमात्र ऐसा कोचिंग संस्थान है जिसका उद्देश्य सिर्फ बच्चों का वेलफेयर करना है! यहां पर हमेशा यह सुनिश्चित किया जाता है कि बच्चे की फीस सिर्फ बच्चे पर खर्च की जानी चाहिए ना की तरह तरह की मार्केटिंग के हथकंडे अपना कर वह पैसे खर्च किए जाए! ENGINEERS PRIDE फिलहाल सिर्फ जयपुर में ऑफलाइन क्लासेस उपलब्ध कराता है वहीं दूसरी ओर ENGINEERS PRIDE की ऑनलाइन क्लासेस देशभर में किसी भी कोने में बैठ कर देखी जा सकती है और हाई क्वालिटी वीडियो देखकर स्टूडेंट्स अपना करियर बना सकते हैं! www.engineerspride.org

Q.4 ENGINEERS PRIDE पर भी कैसे भरोसा किया जाए? क्या पता, फीस जमा होने के बाद , ENGINEERS PRIDE भी वैसा ही करें जैसा बाकी के कोचिंग इंस्टिट्यूट कर रहे हैं?

ANSWER- आपका डाउट एकदम सही है आप ENGINEERS PRIDE पर एक परसेंट भी भरोसा ना करें! आप यहां पर आइए और प्रत्येक सब्जेक्ट की सबसे पहले फ्री डेमो क्लास लीजिए उसके बाद में आप IES गेट एवं एसएससी जेई या फिर अन्य किसी एग्जाम के पुराने 25 साल के पेपर सॉल्व कीजिए एवं उन पेपर को अगर आप  SOLVE कर पाते हो तो आप ENGINEERS PRIDE में सब्जेक्ट वाइज फीस जमा कराकर, आप अपना सिलेबस पूर्ण कर सकते हैं ! आपको ENGINEERS PRIDE में पूरी फीस जमा कराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है! आपको किसी भी तरीके से ENGINEERS PRIDE पर भरोसा करने की कोई आवश्यकता नहीं है! जब आप ENGINEERS PRIDE को एडवांस में फीस दे ही नहीं रहे हो तो भरोसे की यहां पर कोई बात ही नहीं है!

Note-If you have any doubt regarding your career, you can send it to IES B CHAND Whatsapp Number-9660807149

 

 

 

 

 

 



Unique Features of Engineers Pride

  1. Engineers Pride is run by an IITian and I.E.S. (Indian Railways) officer- Mr. B. Chand, who is teaching, guiding and motivating civil engineering students since 2012

2.No student is asked for fee for 1st 2-3 classes of each subject whereas in other institutes 1st of all you have to deposit the fee and after that only you can enter the classroom

3.No institute of India provides subject-wise admission but Engineers Pride provides you subject-wise admission. Engineers pride has got highly talented and well qualified faculties so  providing  demo classes for each subject is pleasure here but other institutes are afraid of providing demo classes of each subject, at the max they will provide you demo class of one or two  subject but not for all subjects because their faculties are not so good for all the subjects

4.In other coaching institutes some faculty might be good but not all but in EP each faculty is good and that’s’why EP provides subject-wise admission

 5.As you know that in the paper of ESE/GATE/SSC-JE , every year approx. 80%  questions have repetitive concepts so  Engineers Pride solves last 25 years questions in classroom itself. No coaching in India is doing so.

6.In other coaching institutes faculty come and teach and then go. After that if you face any doubt who will clear?? Just think about it.But at EP ,students can post any doubt anytime on the android APP

7.Engineers Pride provides free video classes to weak students

8.Engineers Pride conducts personality development workshops for the classroom students so that students can learn public speaking, yoga ,pranayama  and meditation techniques ,which are the need of the hour in such a competitive environment.



FREE FACILITIES FOR STUDENTS

  1. ENGINEERS PRIDE YOU TUBE CHANNEL-this channel has got more than 1000+ free lectures for IES/GATE/SSC-JE examinations

https://www.youtube.com/channel/UCxPLA-yEtbHGCIZfBBbDl9A

 

  1. ENGINEERS PRIDE Free Android APP-Install now

https://play.google.com/store/apps/details?id=com.engineerspride.org

 

  1. Free career counselling by IES B Chand directly/Just Call-7374 999 555

 

  1. Free Doubt Classes for IES/GATE/SSC-JE/Pre+Mains/Only on Engineers Pride Android APP

 

  1. Full/partial scholarships for financially weaker students


Engineers Pride Publication (Imp)

  1. Social Aspect of Engineering
  2. Advance SSC-JE(Prelims)/Civil Engineering/Vol-01 and Vol-02
  3. Advanced SSC-JE(Mains)/Civil Engineering/Vol-01 and Vol-02
  4. Advance SSC-JE (Prelims)/Non-Technical
  5. Detailed Hand-written notes of all the Civil Engineering Subjects
  6. Career Guidance Booklet

Contact-     www.engineerspride.org    [email protected]      +91 7374 999 555

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8078607812,9660807149(Whatsapp), 7014320833,7374999555